सुरक्षा सक्रिय: इस सामग्री से कॉपी करना, राइट-क्लिक, और सेव/प्रिंट शॉर्टकट अक्षम कर दिए गए हैं।
8th Class Science अध्याय 6: "दाब, पवन, झंझावात और चक्रवात"
(Chapter 6 " Pressure, Wind, Storms, and Cyclones") (Class 8 Science Notes in Hindi)
स्मरणीय बिंदु : प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब कहते हैं।
दाब का SI मात्रक N/m2 है और इसे पास्कल भी कहते हैं। इसे Pa से निरूपित किया जाता है।
द्रव एवं गैस पात्र की दीवारों पर दाब आरोपित करते हैं।
हमारे चारों ओर वायु द्वारा लगने वाले दाब को वायुमंडलीय दाब कहते हैं।
वायु दाब में अंतर के कारण ही पवन प्रवाहित होती है।
गरम वायु ऊपर उठकर निम्न दाब क्षेत्र बनाती है। उच्च दाब क्षेत्र के आस-पास की ठंडी वायु निम्न
दाब क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है।
तड़ित झंझावात के निर्माण के लिए आर्द्र एवं तीव्र वायु महत्त्वपूर्ण आवश्यकताएँ हैं।
ऊर्ध्वगामी और अधोगामी तीव्र वायु हिम कणों एवं जल की बूंदों में निघर्षण को सुगम बनाती हैं
जिससे बादलों में वैद्युत आवेश उत्पन्न होता है।
बादलों के भीतर, बादलों के मध्य या बादल और धरातल के मध्य वैद्युत आवेशों के संघट्ट से तड़ित
उत्पन्न होती है।
तड़ित प्रहार से जन-धन की हानि होती है।
तड़ित चालक भवनों को तड़ित के प्रभाव से बचाते हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भारत में चक्रवात और तड़ित-झंझावात का निरंतर
अनुवीक्षण करता है।
8th Class Science अध्याय 6: "दाब, पवन, झंझावात और चक्रवात"
जिज्ञासा बनाए रखें ।
प्रश्न 1. सही विकल्प का चयन कीजिए।
(i) चित्र 6.21 को ध्यानपूर्वक देखिए। पात्र 'ग' में जल भरा जा रहा है। जल भरने की प्रक्रिया रोकने
पर पात्रों में जलस्तर होगा —
(क) पात्र 'क' में उच्चतम
(ख) पात्र 'ख' में उच्चतम
(ग) पात्र 'ग' में उच्चतम
(घ) सभी पात्रों में समान
उत्तर: (घ) सभी पात्रों में समान
व्याख्या : चित्र 6.21 में दिखाए गए तीनों पात्र (क, ख, और ग) नीचे से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं (इसे 'संबद्ध पात्र' या Communicating Vessels कहते हैं)। तरल गतिकी के नियम (द्रव दाब के नियम) के अनुसार, जुड़े हुए बर्तनों में द्रव का स्तर उनके आकार या आकृति पर निर्भर नहीं करता; वह सभी बर्तनों में समान ऊंचाई (जलस्तर) पर ही रहेगा।
प्रश्न 1. (ii) एक रबर चूषक (Rubber Sucker) 'क' को एक समतल चिकने पृष्ठ पर एवं समान चूषक 'ख' को खुरदरे पृष्ठ पर दबाया गया।
(क) 'क' और 'ख' दोनों ही अपने पृष्ठ से चिपक जाएँगे।
(ख) 'क' और 'ख' दोनों अपने पृष्ठ से नहीं चिपकेंगे।
(ग) 'क' चिपक जाएगा परंतु 'ख' नहीं चिपकेगा।
(घ) 'क' नहीं चिपकेगा परंतु 'ख' चिपक जाएगा।
उत्तर: (ग) 'क' चिपक जाएगा परंतु 'ख' नहीं चिपकेगा।
व्याख्या : जब हम एक रबर चूषक को किसी सतह पर दबाते हैं, तो चूषक और सतह के बीच की अधिकांश
वायु बाहर निकल जाती है, जिससे वहाँ निम्न दाब (वायुमंडलीय दाब से कम) पैदा होता है।
- समतल चिकने पृष्ठ ('क') पर वायु दोबारा अंदर नहीं घुस पाती, जिससे बाहर का वायुमंडलीय दाब इसे
सतह से मजबूती से चिपकाए रखता है।
- खुरदरे पृष्ठ ('ख') पर सूक्ष्म दरारें या ऊबड़-खाबड़ जगह होने के कारण बाहरी हवा आसानी से चूषक के
अंदर प्रवेश कर जाती है। हवा के अंदर आने से अंदर और बाहर का दाब बराबर हो जाता है, जिससे चूषक
सतह पर चिपक नहीं पाता।
प्रश्न 1. (iii) किसी भवन की छत पर एक जल की टंकी को H ऊँचाई पर रखा जाता है। भूतल पर जल
को अधिक दाब से प्राप्त करने के लिए हमें करना होगा—
(क) जहाँ टंकी रखी है, उस ऊँचाई H को बढ़ा दिया जाए।
(ख) जहाँ टंकी रखी है उस स्थान की ऊँचाई H को कम कर दिया जाए।
(ग) टंकी को समान ऊँचाई वाली दूसरी टंकी जिसमें अधिक जल आ सके,से परिवर्तित कर दिया जाए।
(घ) टंकी को समान ऊँचाई की दूसरी टंकी जिसमें कम जल आ सके, से परिवर्तित कर दिया जाए।
उत्तर: (क) जहाँ टंकी रखी है, उस ऊँचाई H को बढ़ा दिया जाए।
व्याख्या: द्रव स्तंभ के कारण उत्पन्न दाब गहराई या ऊँचाई पर निर्भर करता है (P=ρgh)। ऊँचाई (H)
जितनी अधिक होगी, भूतल (ground floor) पर पानी का दाब उतना ही अधिक मिलेगा।
प्रश्न 1. (iv) दर्शाए गए चित्र 6.22 में दो पात्र 'क' और 'ख' में समान स्तर तक जल भरा गया।
दोनों पात्रों में लगने वाले दाब क्रमशः Pक और Pख तथा बल क्रमशः Fक और Fख में संबंध होगा।
(क) Pक=Pख , Fक=Fख
(ख) Pक= Pख , Fक< Fख(ग) Pक< Pख , Fक= Fख
(घ) Pक> Pख , Fक> Fख
उत्तर: (ख) Pक= Pख , Fक< Fख
व्याख्या: चूँकि दोनों पात्रों में जल का स्तर (ऊँचाई) समान है, इसलिए उनके आधार पर लगने वाला
द्रव दाब बराबर होगा (Pक=Pख)। लेकिन बल = दाब × क्षेत्रफल (F=P×A) होता है। चूँकि पात्र 'ख' का
आधार क्षेत्रफल पात्र 'क' से अधिक चौड़ा दिखाई दे रहा है, इसलिए उसके आधार पर लगने वाला
कुल बल अधिक होगा (Fक<Fख)।
प्रश्न 2. बताइए निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य—
(i) वायु उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र की ओर बहती है।
उत्तर: सत्य (हवा हमेशा उच्च वायुदाब से कम वायुदाब वाले क्षेत्र की ओर चलती है।)
(ii) द्रव केवल पात्र के तल पर दाब डालते हैं।
उत्तर: असत्य (द्रव पात्र के तल के साथ-साथ उसकी दीवारों पर भी पार्श्व दाब डालते हैं।)
(iii) चक्रवात अक्ष में मौसम झंझावाती होता है।
उत्तर: असत्य (चक्रवात की आँख या अक्ष का केंद्र शांत क्षेत्र होता है, जहाँ बादल और तेज हवाएं नहीं होतीं।)
(iv) तड़ितझंझा के समय हम कार में सुरक्षित रहते हैं।
उत्तर: सत्य (कार की धातु की बॉडी एक 'फैराडे केज' की तरह काम करती है, जो बिजली को अंदर बैठे
व्यक्ति तक नहीं पहुँचने देती।)
प्रश्न 3. चित्र 6.23 (क) में रेतीली सतह पर एक लड़के को क्षैतिज रूप से लेटा हुआ दर्शाया गया है और
चित्र 6.23 (ख) में लड़के को ऊर्ध्वाधर खड़ा हुआ दर्शाया गया है। किस स्थिति में लड़का रेत के अंदर
अधिक धँसेगा? कारण दीजिए।
उत्तर: लड़का चित्र 6.23 (ख) यानी खड़ी हुई स्थिति में रेत के अंदर अधिक धँसेगा।
कारण: दाब का सूत्र है:
दाब=बल (या भार) / क्षेत्रफल
दोनों स्थितियों में लड़के का भार (बल) समान है। लेकिन खड़ी स्थिति में रेत के संपर्क में आने
वाला क्षेत्रफल (केवल पैर) बहुत कम होता है। कम क्षेत्रफल के कारण रेत पर लगने वाला दाब बहुत
अधिक हो जाता है, जिससे वह अंदर धँस जाता है। लेटने पर क्षेत्रफल बढ़ जाता है और दाब कम हो जाता है।
प्रश्न 4. एक हाथी अपने चारों पैरों पर खड़ा है। यदि एक पैर द्वारा घेरे जाने वाला क्षेत्रफल
0.25 m2 है और हाथी का भार 20000 N है तो हाथी द्वारा स्थल पर आरोपित दाब की
गणना कीजिए।
उत्तर: एक पैर का क्षेत्रफल = 0.25 m2
चारों पैरों का कुल क्षेत्रफल (A) = 4×0.25=1.00 m2
हाथी का कुल भार (बल, F) = 20000 N
दाब (P) का सूत्र लगाने पर :
P=F/ A
P=20000 N / 1.00 m2
=20000 N/m2 (या Pa)
हाथी द्वारा स्थल पर आरोपित दाब 20000 Pa है।
प्रश्न 5. 'क' और 'ख' दो नाव हैं। नाव 'क' के आधार का क्षेत्रफल 7 m2 है और उसमें 5
लोग बैठे हैं। नाव 'ख' के आधार का क्षेत्रफल 3.5 m2 है और उसमें 3 लोग बैठे हैं।
यदि प्रत्येक व्यक्ति का भार 700 N है तो पता लगाएँ कि किस नाव के आधार पर
अधिक दाब लगेगा और कितना?
उत्तर: यहाँ नावों के अपने भार को नगण्य मानते हुए केवल व्यक्तियों के भार से गणना की गई है-
नाव 'क' के लिए:
आधार का क्षेत्रफल (Aक) = 7 m2
5 लोगों का कुल भार (Fक) = 5×700 N
=3500 N
दाब (Pक) = 3500 N / 7m2
=500 N/m2 (Pa)
नाव 'ख' के लिए:
आधार का क्षेत्रफल (Aख) = 3.5 m2
3 लोगों का कुल भार (Fख) = 3×700 N
=2100 N
दाब (Pख) = 2100 N / 3.5 m2
= 600 N/m2 (Pa)
निष्कर्ष: नाव 'ख' के आधार पर अधिक दाब लगेगा।
अंतर: 600 Pa−500 Pa =100 Pa अधिक दाब लगेगा।
प्रश्न 6. यदि वायु और बादल दोनों विद्युत के सुचालक होते तो क्या तड़ित उत्पन्न होती?
अपने उत्तर का कारण दीजिए।
उत्तर: नहीं, तब तड़ित (बिजली) उत्पन्न नहीं होती।
कारण: तड़ित तब उत्पन्न होती है जब बादलों में बहुत भारी मात्रा में विपरीत विद्युत आवेश
(धनात्मक और ऋणात्मक) जमा हो जाते हैं और उनके बीच की हवा (जो कि विद्युत की कुचालक होती है)
उस आवेश को रोक नहीं पाती। यदि वायु और बादल सुचालक होते, तो जैसे ही थोड़ा सा भी आवेश बनता,
वह तुरंत और लगातार बिना किसी रुकावट के पृथ्वी में या आपस में धीरे-धीरे प्रवाहित (neutralize)
हो जाता। इस स्थिति में भारी मात्रा में आवेश कभी संचित नहीं हो पाता और न ही तड़ित जैसी तीव्र
घटना होती।
प्रश्न 7. यदि बोतल में जल एक निश्चित ऊँचाई तक भर दिया जाए तो दर्शाए गए चित्र 6.24 के अनुसार
दो समान गुब्बारों 'क' और 'ख' का क्या होगा? क्या दोनों गुब्बारे फूलेंगे? यदि हाँ, तो क्या वे समान रूप
से फूलेंगे? अपने उत्तर को समझाइए।
उत्तर: हाँ, दोनों गुब्बारे फूलेंगे और वे बिल्कुल समान रूप से फूलेंगे।
कारण: चित्र 6.24 में दोनों गुब्बारे बोतल के निचले हिस्से में एक ही क्षैतिज स्तर (समान गहराई) पर
जुड़े हुए हैं। द्रवों का एक नियम है कि एक ही गहराई पर द्रव सभी दिशाओं में समान दाब डालता है।
चूँकि दोनों गुब्बारों पर पानी द्वारा लगाया जाने वाला पार्श्व दाब (side pressure) बिल्कुल बराबर
होगा, इसलिए दोनों गुब्बारे एक समान आकार में फूलेंगे।
प्रश्न 8. व्याख्या कीजिए कि झंझावात चक्रवात में किस प्रकार परिवर्तित हो जाता है।
उत्तर: झंझावात से चक्रवात बनने की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में होती है:
तापमान और वाष्पीकरण: समुद्र के ऊपर की वायु गर्म होकर ऊपर उठती है, जिससे वहाँ निम्न वायुदाब
का क्षेत्र बन जाता है। इस हवा के साथ भारी मात्रा में जलवाष्प भी ऊपर जाती है।
ऊष्मा का निकलना (गुप्त ऊष्मा): जब यह जलवाष्प ऊपर जाकर ठंडी होती है और दोबारा पानी की
बूंदों (बादल) में बदलती है, तो वह हवा से ली गई ऊष्मा को वापस वायुमंडल में छोड़ देती है।
दाब चक्र का बनना: इस ऊष्मा से आसपास की हवा और गर्म होकर तेजी से ऊपर उठती है, जिससे
केंद्र में वायुदाब और भी कम हो जाता है। इस अत्यंत कम दाब वाले केंद्र को भरने के लिए आसपास की
ठंडी और उच्च दाब वाली हवाएँ बहुत तेज गति से केंद्र की ओर दौड़ती हैं।
चक्रवातीय गति: पृथ्वी के घूर्णन (घूमने) के कारण यह तेज हवाएँ सीधे न जाकर एक चक्राकार (घूमते हुए)
रूप में चक्कर काटने लगती हैं। इस प्रकार एक अत्यंत तीव्र गति वाला घूमता हुआ झंझावात तंत्र विकसित
हो जाता है, जिसे हम चक्रवात कहते हैं।
प्रश्न 9. चित्र 6.25 में गर्मियों की दोपहर के समय में समुद्र तट पर पेड़ों को दर्शाया गया है।
पहचानिए ‘क’ अथवा ‘ख’ में स्थल किस ओर है। अपने उत्तर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: चित्र 6.25 में 'ख' की ओर स्थल (जमीन) है और 'क' की ओर समुद्र (जल) है।
स्पष्टीकरण (समुद्र समीर का नियम): गर्मियों की दोपहर में सूर्य की गर्मी से स्थल (जमीन) पानी की
तुलना में बहुत जल्दी गर्म हो जाता है।जमीन के ऊपर की हवा गर्म होकर ऊपर उठती है, जिससे जमीन
पर निम्न दाब बनता है। इसे भरने के लिए समुद्र की ओर से ठंडी हवाएँ जमीन (थल) की तरफ बहने
लगती हैं, जिसे समुद्र समीर (Sea Breeze) कहते हैं।चित्र 6.25 में पेड़ों के झुकाव को देखने से साफ
पता चलता है कि हवा 'क' से 'ख' की ओर (बाईं से दाईं तरफ) बह रही है। दोपहर में हवा समुद्र से थल की
तरफ चलती है, अतः 'क' समुद्र है और 'ख' स्थल है।
प्रश्न 10. ऐसे किसी क्रियाकलाप का वर्णन कीजिए जो यह दर्शाए कि वायु उच्च दाब क्षेत्र से निम्न दाब क्षेत्र
की ओर बहती है।
उत्तर: क्रियाकलाप (गुब्बारे का प्रयोग):
विधि: एक गुब्बारे को अपने मुँह से हवा भरकर फुलाएं और उसके मुंह को उंगली से दबाकर बंद कर लें।
अब गुब्बारे के अंदर हवा का दाब (उच्च दाब) बाहर के वायुमंडलीय दाब (निम्न दाब) से अधिक है। जैसे ही
आप अपनी उंगली हटाते हैं, अंदर की हवा तेजी से बाहर की ओर भागती है।
निष्कर्ष: यह प्रयोग स्पष्ट रूप से दिखाता है कि हवा हमेशा अपने उच्च दाब वाले क्षेत्र (गुब्बारे के अंदर) से
निम्न दाब वाले क्षेत्र (गुब्बारे के बाहर) की ओर प्रवाहित होती है।
प्रश्न 11. तड़ितझंझा क्या है? इसके निर्माण प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: तड़ितझंझा (Thunderstorm): यह गरज और बिजली (तड़ित) के साथ आने वाला एक तीव्र
स्थानीय तूफान है, जिसमें तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा होती है।
निर्माण प्रक्रिया: भारत जैसे गर्म और आर्द्र (humid) उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जब तापमान बढ़ता है, तो
ऊपर की ओर उठने वाली गर्म हवाएँ (ऊर्ध्वगामी पवन) बहुत तीव्र हो जाती हैं। यह हवाएँ अपने साथ हवा
में मौजूद नमी (जलवाष्प) को ऊपर ले जाती हैं, जहाँ कम तापमान के कारण वे जमकर बर्फ या पानी की
बूंदें बन जाती हैं। जब ये भारी बूंदें या हिम कण नीचे गिरते हैं और तीव्र गर्म हवाएँ ऊपर उठती हैं, तो
इनके आपस में टकराने (निघर्षण) से बादलों में भारी मात्रा में विद्युत आवेश उत्पन्न होता है। इसी आवेश
के कारण कड़क और बिजली के साथ तड़ितझंझा का निर्माण होता है।
प्रश्न 12. उस प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए जिसके कारण तड़ित उत्पन्न होती है।
उत्तर: बादलों में तड़ित (बिजली) उत्पन्न होने की प्रक्रिया को विद्युत विसर्जन (Electric Discharge) कहा
जाता है:
तड़ितझंझा के समय बादलों के ऊपरी हिस्से में धनात्मक आवेश (+) और निचले हिस्से में ऋणात्मक
आवेश (-) जमा हो जाता है। साथ ही, धरती के पास भी धनात्मक आवेश (+) एकत्रित होने लगता है।
सामान्यतः हवा विद्युत की कुचालक होती है, लेकिन जब जमा हुए आवेशों की मात्रा बहुत अधिक हो
जाती है, तो हवा का कुचालक गुण समाप्त हो जाता है।
इसके परिणामस्वरूप ऋणात्मक और धनात्मक आवेश एक दूसरे से मिलने के लिए हवा के माध्यम से
बहुत तीव्र गति से एक संकीर्ण रास्ते से प्रवाहित होते हैं। इस टकराव से अत्यधिक मात्रा में प्रकाश
की चमकीली लकीर और भयानक गरज पैदा होती है, जिसे हम बिजली का गिरना या तड़ित कहते हैं।
प्रश्न 13. व्याख्या कीजिए कि प्रदर्शापट्ट (बैनर) और विज्ञापन पट्ट (होर्डिंग्स) में छिद्र क्यों बनाए जाते हैं।
उत्तर: हवा या पवन गतिशील होने पर बहुत अधिक दाब डालती है। यदि बड़े-बड़े बैनर या होर्डिंग्स पूरी तरह
से बंद (ठोस) होंगे, तो तेज हवा चलने पर वे हवा के भारी दबाव को झेल नहीं पाएंगे और फट जाएंगे या
उनके लोहे के फ्रेम उखड़ कर गिर जाएंगे। पट्टों में छोटे-छोटे छिद्र (holes) बना देने से हवा आसानी से
उनके आर-पार निकल जाती है। इससे बैनर पर लगने वाला हवा का कुल दाब बहुत कम हो जाता है
और वे तेज आंधी में भी सुरक्षित बचे रहते हैं।








No comments:
Post a Comment
Your comment is valuable for us to improve the post.Thanks.