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Sunday, July 5, 2026

7th Class Science अध्याय -2 पदार्थों का अन्वेषण अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन। Chapter 2: Investigation of substances acidic, alkaline and neutral.

  

7th Class Science अध्याय -2 पदार्थों का अन्वेषण अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन।

Chapter 2: Investigation of substances acidic, alkaline and neutral.

अध्याय -2 पदार्थों का अन्वेषण अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन।  

                 (Class 7th Science Notes in Hindi)

पाठ का सारांश (Summary) : अध्याय का संक्षिप्त विवरण (Description)

यह अध्याय मुख्य रूप से अम्ल (Acids), क्षार (Bases) और उदासीन (Neutral) पदार्थों की पहचान और उनके गुणों पर आधारित है

अम्ल (Acid): स्वाद में खट्टे होते हैं और नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं। (जैसे: नींबू का रस, सिरका, इमली का पानी)

क्षार (Base): स्वाद में कड़वे और छूने पर साबुन जैसे चिकने होते हैं। ये लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं (जैसे: साबुन का विलयन, चूने का पानी, बेकिंग सोडा)

उदासीन (Neutral): ये न तो अम्लीय होते हैं और न ही क्षारीय। ये लिटमस पत्र के रंग को नहीं बदलते(जैसे: नमक का पानी, चीनी का विलयन, नल का पानी)

सूचक (Indicators): ऐसे पदार्थ जो अम्लीय या क्षारीय माध्यम में अपना रंग या गंध बदल लेते हैं. इसमें प्राकृतिक सूचक (लिटमस जो लाइकेन से मिलता है, लाल गुलाब का अर्क, हल्दी) और घ्राण सूचक (जैसे प्याज) शामिल हैं

उदासीनीकरण (Neutralisation): जब अम्ल और क्षार को निश्चित मात्रा में मिलाया जाता है, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं और लवण (Salt), जल तथा ऊष्मा बनाते हैं

Class 7th Science 2-पदार्थों का अन्वेषण अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन।

Chapter 2: Investigation of substances acidic, alkaline and neutral

आइए, और अधिक सीखेें :

प्रश्न 1: एक विलयन लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है। निम्नलिखित मेें से कौन सा विलयन (घोल) ज़्यादा मात्रा में मिलाने पर इस परिवर्तन को उत्कक्रमित कर देगा?

(i) चूने का पानी

(ii) बेकिंग सोडा

(iii) सिरका

(iv) साधारण नमक का घोल

उत्तर : (iii) सिरका है।

वैज्ञानिक कारण: दिए गए विकल्पों में से सिरका एक अम्लीय पदार्थ है (इसमें एसिटिक अम्ल होता है)। जब हम क्षारीय घोल में अधिक मात्रा में सिरका मिलाएंगे, तो वह क्षार के प्रभाव को उदासीन करके विलयन को अम्लीय बना देगा, जिससे लिटमस पत्र का रंग वापस लाल हो जाएगा।

प्रश्न 2: आपको ‘क ’, ‘ख ’, और ‘ग ’ नामांकित (लेबल वाले) तीन अज्ञात विलयन (घोल) दिए गए हैं, लेकिन आप नहीं जानते है कि इनमें से कौन-सा विलयन अम्लीय, क्षारीय या उदासीन है। विलयन ‘क ’ में लाल लिटमस विलयन की कुछ बूंदें डालने पर वह नीला हो जाता है। जब हल्दी के विलयन की कुछ बूंदें विलयन ‘ख ’ में डाली जाती हैं, तो वह लाल हो जाता है। अंत में, विलयन ‘ग ’ में गुलाब के अर्क की कुछ बूंदें डालने पर वह हरा हो जाता है। इन प्रेक्षणों (अवलोकनों) के आधार पर, ‘क ’, ‘ख ’, और ‘ग ’ की प्रकृति के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा क्रम सही है?

(i) अम्लीय, अम्लीय, और अम्लीय

(ii) उदासीन, क्षारीय, और क्षारीय

(iii) क्षारीय, अम्लीय, और क्षारीय

(iv) क्षारीय, क्षारीय, और क्षारीय

उत्तर : (iv) क्षारीय, क्षारीय, और क्षारीय

विलयन ‘क’: यह लाल लिटमस को नीला कर देता है। हम जानते हैं कि क्षारीय (Basic) विलयन लाल लिटमस को नीला कर देते हैं। इसलिए, ‘क’ की प्रकृति क्षारीय है।

  1. विलयन ‘ख’: यह हल्दी के विलयन को लाल कर देता है। हल्दी एक प्राकृतिक सूचक है जो केवल क्षारीय (Basic) विलयन के संपर्क में आने पर लाल रंग देती है (अम्लीय या उदासीन में इसका रंग पीला ही रहता है)। इसलिए, ‘ख’ की प्रकृति भी क्षारीय है।

  2. विलयन ‘ग’: यह गुलाब (गुड़हल/China Rose) के अर्क को हरा कर देता है। गुड़हल का अर्क अम्लीय विलयन को गहरा गुलाबी (मैजेंटा) और क्षारीय (Basic) विलयन को हरा कर देता है। इसलिए, ‘ग’ की प्रकृति भी क्षारीय है।

चूँकि तीनों ही विलयन (‘क ’, ‘ख ’, और ‘ग ’) क्षारीय प्रकृति के हैं, इसलिए सही क्रम (iv) है।

प्रश्न 3 :चित्र 2.13, चित्र 2.14 और चित्र 2.15 का अवलोकन कर उनका विश्लेषण कीजिए। इनमें लाल गुलाब के अर्क में भिगोई हुई कागज की पट्टियों का उपयोग किया गया है। प्रत्येक पात्र में उपस्थित विलयन की प्रकृति को नामांकित कीजिए।

  

उत्तर: लाल गुलाब का अर्क (या गुड़हल का अर्क) एक प्राकृतिक सूचक (Natural Indicator) है। यह अलग-अलग माध्यमों (अम्लीय, क्षारीय या उदासीन) में निम्नलिखित रंग परिवर्तन दिखाता है:

  • क्षारीय (Basic) माध्यम में: इसका रंग बदलकर गहरा हरा हो जाता है।

  • उदासीन (Neutral) माध्यम में: इसके रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता (यह गुलाबी ही रहता है)

  • अम्लीय (Acidic) माध्यम में: इसका रंग बदलकर गहरा गुलाबी या मैजेंटा (लाल जैसा) हो जाता है।

चित्रों के अवलोकन के आधार पर प्रत्येक पात्र के विलयन की प्रकृति इस प्रकार है:

  1. चित्र 2.13 (पात्र 1):

    • अवलोकन: पट्टी का रंग बदलकर हरा हो जाता है।

    • विलयन की प्रकृति: क्षारीय (Basic)

  2. चित्र 2.14 (पात्र 2):

    • अवलोकन: पट्टी के रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

    • विलयन की प्रकृति: उदासीन (Neutral)

  3. चित्र 2.15 (पात्र 3):

    • अवलोकन: पट्टी का रंग बदलकर गहरा गुलाबी/लाल हो जाता है।

    • विलयन की प्रकृति: अम्लीय (Acidic)

प्रश्न 4 :प्रयोगशाला में एक द्रव प्रतिदर्श (sample) का परीक्षण विभिन्न सूचकों का उपयोग करके किया गया —

सूचक

लाल लिटमस

नीला लिटमस

हल्दी

परिवर्तन

कोई परिवर्तन नहीं

लाल में परिवर्तित

रंग में कोई परिवर्तन नहीं

परीक्षणों के आधार पर द्रव की अम्लीय अथवा क्षारीय प्रकृति की पहचान कीजिए और अपने उत्तर 

की पुष्टि कीजिए।

उत्तर : दिए गए परीक्षणों के आधार पर यह द्रव अम्लीय (Acidic) प्रकृति का है।

उत्तर की पुष्टि (कारण):

  1. नीला लिटमस परीक्षण: द्रव ने नीले लिटमस पत्र को लाल रंग में बदल दिया है। हम जानते हैं कि अम्ल (Acids) नीले लिटमस को लाल कर देते हैं।

  2. लाल लिटमस परीक्षण: द्रव डालने पर लाल लिटमस के रंग में कोई परिवर्तन नहीं हुआ (वह लाल ही रहा), जो कि अम्ल की एक मुख्य विशेषता है।

  3. हल्दी परीक्षण: हल्दी एक प्राकृतिक सूचक है जो क्षारीय माध्यम में लाल हो जाती है, लेकिन अम्लीय माध्यम में इसके पीले रंग में कोई परिवर्तन नहीं होता है। यहाँ भी रंग में कोई बदलाव नहीं हुआ, जो द्रव के अम्लीय होने की पुष्टि करता है।

निष्कर्ष:

चूँकि द्रव नीले लिटमस को लाल करता है और लाल लिटमस तथा हल्दी के रंग को नहीं बदलता, इसलिए द्रव की प्रकृति अम्लीय है।

प्रश्न 5 : मान्या की आँखों पर पट्टी बँधी है। उसे दो अज्ञात विलयन दिए गए हैं जिससे वह जाँच कर सके कि वे अम्लीय हैं या क्षारीय। मान्या को विलयनों का परीक्षण करने के लिए किस सूचक का उपयोग करना चाहिए और क्यों?

उत्तर: मान्या को गंधीय सूचकों (Olfactory Indicators) जैसे— प्याज का रस, वैनिला एसेंस या लौंग के तेल का उपयोग करना चाहिए।

कारण: चूँकि मान्या की आँखों पर पट्टी बँधी है, वह लिटमस पत्र या हल्दी जैसे सूचकों का रंग बदलते हुए नहीं देख सकती। गंधीय सूचकों की गंध अम्लीय और क्षारीय माध्यम में बदल जाती है। उदाहरण के लिए, क्षारीय विलयन में प्याज या वैनिला की गंध गायब हो जाती है, जबकि अम्लीय विलयन में इसकी गंध पर कोई असर नहीं पड़ता। मान्या इसे आसानी से सूँघकर पहचान सकती है।

प्रश्न 6: क्या आप विभिन्न सामग्रियों का सुझाव दे सकते हैं जिनका उपयोग श्वेत कागज (अध्याय के आरम्भ में दिया गया) पर संदेश लिखने के लिए किया जा सकता है और छिड़काव वाली बोतल में क्या लिया जा सकता है? विभिन्न संभावित संयोजनों और उनके प्रयोग से प्राप्त लेखन के रंगों को एक तालिका में लिखिए।

उत्तर: हाँ, अदृश्य या गुप्त संदेश लिखने के लिए हम विभिन्न प्राकृतिक और रासायनिक सूचकों का उपयोग कर सकते हैं। नीचे संभावित संयोजनों की तालिका दी गई है:

लिखने के लिए प्रयुक्त सामग्री (स्याही)

छिड़काव वाली बोतल में प्रयुक्त सामग्री (डेवलपर)

प्राप्त लेखन का रंग

फेनोफ्थलीन विलयन

सोडियम हाइड्रोक्साइड / साबुन का पानी (क्षार)

गुलाबी (Pink)

हल्दी का पानी

चूने का पानी या डिटर्जेंट घोल (क्षार)

लाल-भूरा (Reddish-brown)

नींबू का रस (अम्ल)

जामुन या चाइना रोज (गुड़हल) का अर्क

लाल / गहरा गुलाबी

बेकिंग सोडा का घोल (क्षार)

जामुन या चाइना रोज (गुड़हल) का अर्क

हरा / नीला-हरा

नींबू का रस (वैकल्पिक तरीका)

कोई छिड़काव नहीं (कागज को हल्का गर्म करने पर)

भूरा (Brown)



प्रश्न 7: आँगुर (अंगूर) के रस को लाल गुलाब के अर्क के साथ मिलाया गया। मिश्रण का रंग हल्का लाल हो गया। यदि इस मिश्रण में बेकिंग सोडा मिला दिया जाए तो क्या होगा? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

उत्तर: यदि इस मिश्रण में बेकिंग सोडा मिला दिया जाए, तो मिश्रण का रंग बदलकर हरा या नीला-हरा हो जाएगा और साथ ही बुदबुदाहट के साथ कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस निकलेगी।

पुष्टि (कारण): अंगूर के रस में टार्टरिक अम्ल (Acid) होता है, जिसके कारण लाल गुलाब का अर्क (जो एक प्राकृतिक सूचक है) हल्का लाल रंग दिखाता है। बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) एक क्षार (Base) है। जब इसे मिश्रण में मिलाया जाता है, तो यह अम्ल को उदासीन (neutralize) करने लगता है और माध्यम को क्षारीय बना देता है। क्षारीय माध्यम में गुलाब के अर्क का रंग हरा हो जाता है। साथ ही, अम्ल और बेकिंग सोडा की क्रिया से CO2 गैस के बुलबुले बनते हैं।

प्रश्न 8: अश्विन ने अपनी दादी के जन्मदिन पर संतरे के रस का उपयोग करके उन्हें एक गुप्त संदेश लिखा। क्या आप संदेश को दृश्यमान करने में दादी की सहायता कर सकते हैं? इसे दृश्यमान करने के लिए आप किस सूचक का प्रयोग करेंगे?

उत्तर: हाँ, दादी इस संदेश को दो तरीकों से देख सकती हैं:

सूचक का प्रयोग करके: चूँकि संतरे के रस में सिट्रिक अम्ल होता है, इसे दृश्यमान करने के लिए दादी चाइना रोज (गुड़हल) के अर्क या लाल बंदगोभी के रस का छिड़काव सूचक के रूप में कर सकती हैं। इससे अक्षरों का रंग गहरा गुलाबी (Magenta) हो जाएगा।

भौतिक तरीका (बिना सूचक के): दादी इस कागज को किसी जलती हुई मोमबत्ती या बल्ब की हल्की आँच/गर्मी के ऊपर रख सकती हैं। गर्म होने पर संतरे के रस में मौजूद शर्करा और अम्ल जल जाते हैं (कार्मलाइजेशन होता है), जिससे संदेश भूरे रंग में उभर कर साफ़ दिखने लगेगा।

प्रश्न 9: प्राकृतिक सूचक कैसे तैयार किया जा सकता है? उदाहरण देकर समझािए।

उत्तर: प्राकृतिक सूचक को प्रकृति में पाए जाने वाले पौधों, फूलों की पंखुड़ियों या सब्जियों के अर्क से तैयार किया जा सकता है। 

उदाहरण - चाइना रोज (गुड़हल) का सूचक तैयार करने की विधि:

विधि: गुड़हल के फूल की कुछ पंखुड़ियों को इकट्ठा करें और उन्हें एक बीकर में रखें। उसमें थोड़ा गुनगुना पानी मिलाएँ। मिश्रण को तब तक रखा रहने दें जब तक कि पानी रंगीन (हल्का गुलाबी) न हो जाए। अब पंखुड़ियों को छानकर अलग कर लें। आपका प्राकृतिक सूचक तैयार है।

परीक्षण: यह सूचक अम्लीय विलयन को गहरा गुलाबी (मैजेंटा) और क्षारीय विलयन को हरा कर देता है। (इसी प्रकार हल्दी पाउडर में पानी मिलाकर या चुकंदर को उबालकर भी प्राकृतिक सूचक बनाया जा सकता है)

प्रश्न 10 : आपको तीन द्रव पदार्थ दिए गए हैं। एक सिरका, दूसरा बेकिंग सोडा का विलयन और तीसरा चीनी का विलयन। क्या आप मात्र हल्दी-पत्र का उपयोग करके उन्हें पहचान सकते हैं? व्याख्या कीजिए।

उत्तर: हाँ, हम मात्र हल्दी-पत्र (Turmeric paper) का उपयोग करके इन तीनों द्रवों की पहचान कर सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित चरणों (steps) का पालन करेंगे:

(I). बेकिंग सोडा के विलयन की पहचान: तीनों विलयनों की एक-एक बूँद को अलग-अलग हल्दी-पत्र की पट्टियों पर डालेंगे। जिस विलयन से हल्दी-पत्र का रंग पीला से लाल या लाल-भूरा हो जाता है, वह बेकिंग सोडा का विलयन है, क्योंकि हल्दी केवल क्षारीय (basic) विलयन में ही अपना रंग बदलती है।

(ii). बाकी दो द्रवों की पहचान (सिरका और चीनी का विलयन): अब हम लाल-भूरे हो चुके हल्दी-पत्र की दो अलग पट्टियाँ लेंगे (जो बेकिंग सोडा के संपर्क में आने से लाल हुई थीं)। इन पट्टियों पर बचे हुए दोनों विलयनों (सिरका और चीनी का घोल) की बूँदें अलग-अलग डालेंगे।

सिरका की पहचान: जिस पट्टी का लाल-भूरा रंग वापस पीला हो जाता है, वह सिरका (अम्ल) है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सिरका में मौजूद अम्ल बेकिंग सोडा के क्षार को उदासीन (neutralize) कर देता है।

चीनी के विलयन की पहचान: जिस पट्टी के लाल-भूरे रंग में कोई बदलाव नहीं होता (वह लाल ही रहता है), वह चीनी का विलयन (उदासीन) है, क्योंकि उदासीन विलयन हल्दी के रंग पर कोई प्रभाव नहीं डालता।

प्रश्न 11: द्रव X को लाल गुलाब का अर्क हरा कर देता है। द्रव X की प्रकृति क्या होगी? जब द्रव X में आँवले का रस अधिक मात्रा में मिश्रित किया जाता है तो क्या होगा?

उत्तर: द्रव X की प्रकृति: द्रव X की प्रकृति क्षारीय (Basic) होगी।

कारण: लाल गुलाब का अर्क (या गुड़हल/चाइना रोज का अर्क) एक प्राकृतिक सूचक है, जो क्षारीय माध्यम या विलयन के संपर्क में आने पर हरा रंग प्रदर्शित करता है।

आँवले का रस अधिक मात्रा में मिलाने पर : जब द्रव X में अधिक मात्रा में आँवले का रस मिलाया जाएगा, तो विलयन का हरा रंग धीरे-धीरे गायब हो जाएगा और अंत में वह हल्का गुलाबी या लाल रंग में बदल जाएगा।

कारण: आँवले के रस में प्रचुर मात्रा में 'सिट्रिक अम्ल' और 'एस्कॉर्बिक अम्ल' (विटामिन C) पाया जाता है। जब इस अम्ल को क्षारीय द्रव X में अधिक मात्रा में मिलाया जाता है, तो यह क्षार को उदासीन (neutralize) कर देता है। जब अम्ल की मात्रा अधिक हो जाती है, तो पूरा माध्यम अम्लीय हो जाता है। अम्लीय माध्यम होने के कारण लाल गुलाब का अर्क अपना रंग बदलकर गुलाबी या हल्का लाल कर देता है।

प्रश्न 12: निम्नलिखित प्रवाह चित्र में दी गई सूचनाओं का अवलोकन कीजिए और उनका 

विश्लेषण कीजिए। अधूरी जानकारी को पूरा कीजिए।

 उत्तर: प्रवाह चित्र के अनुसार रिक्त स्थानों की सही पूर्ति नीचे दी गई है:

(i). बाएँ तरफ का बॉक्स (मृदा की पहली संभावित प्रकृति): मृदा की प्रकृति अम्लीय हो सकती है।

(ii). दाएँ तरफ का बॉक्स (मृदा की दूसरी संभावित प्रकृति): मृदा की प्रकृति क्षारीय हो सकती है।

मध्य का बॉक्स :

मृदा की प्रकृति का परीक्षण करने के लिए किस सूचक का उपयोग किया जा सकता है?

सूचक का नाम : लिटमस पत्र (या यूनिवर्सल इंडिकेटर / पीएच पत्र)

नीचे बाएँ तरफ का बॉक्स (अम्लीय मृदा का उपचार): अम्लीय मृदा का उपचार बिना बुझा हुआ चूना (कैल्शियम ऑक्साइड) या बुझा हुआ चूना (कैल्शियम हाइड्रोक्साइड) से किया जा सकता है।

नीचे दाएँ तरफ का बॉक्स (क्षारीय मृदा का उपचार) : क्षारीय मृदा का उपचार जैव पदार्थ 

(जैसे कम्पोस्ट खाद या जैविक खाद) से किया जा सकता है।

                    अथवा

पूरे प्रवाह चित्र का संक्षेप में विवरण:

एक उद्यान की कल्पना कीजिए जिसमें पौधे स्वस्थ दिखाई नहीं दे रहे हैं।

संभावना 1: मृदा की प्रकृति अम्लीय हो सकती है।

संभावना 2: मृदा की प्रकृति क्षारीय हो सकती है।

परीक्षण: मृदा की प्रकृति का परीक्षण करने के लिए लिटमस पत्र / पीएच (pH) पत्र का उपयोग किया जा सकता है।

उपचार 1: अम्लीय मृदा का उपचार चूने (बुझा हुआ या बिना बुझा चूना) से किया जा सकता है (क्योंकि चूना क्षारीय होता है और अम्ल को उदासीन करता है)

उपचार 2: क्षारीय मृदा का उपचार जैविक खाद / कम्पोस्ट से किया जा सकता है (क्योंकि जैव पदार्थ अम्ल मुक्त करते हैं जो मृदा के क्षार को उदासीन करते हैं)

अध्याय 2: पदार्थों का अन्वेषण अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं:

भाग 1: महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर (Important Questions & Answers)

प्रश्न 1: लिटमस क्या है और यह कहाँ से प्राप्त होता है?

उत्तर: लिटमस एक प्राकृतिक सूचक (Indicator) है जिसका उपयोग पदार्थों की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति की जाँच के लिए किया जाता है। यह लाइकेन (Lichen) नामक जीव से प्राप्त होता है। यह नीले और लाल कागज़ की पट्टियों (लिटमस पत्र) या विलयन के रूप में उपलब्ध होता है।

प्रश्न 2: उदासीनीकरण अभिक्रिया (Neutralisation Reaction) किसे कहते हैं? समीकरण सहित लिखिए

उत्तर: जब किसी अम्ल के विलयन को किसी क्षार के विलयन में उचित मात्रा में मिलाया जाता है, तो दोनों एक-दूसरे के प्रभाव को समाप्त (उदासीन) कर देते हैं। इस प्रक्रिया को उदासीनीकरण कहते हैं। इसमें लवण, जल और ऊष्मा का निर्माण होता है।

अम्ल + क्षार   → लवण + जल + ऊष्मा

प्रश्न 3: लाल चींटी के काटने पर त्वचा पर बेकिंग सोडा रगड़ने से आराम क्यों मिलता है?

उत्तर: जब चींटी काटती है, तो वह त्वचा में फॉर्मिक अम्ल (अम्लीय द्रव) छोड़ देती है जिससे जलन और दर्द होता है। जब इस पर क्षारीय प्रकृति का नम बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) रगड़ा जाता है, तो वह अम्ल के प्रभाव को उदासीन कर देता है और दर्द से राहत मिलती है।

प्रश्न 4: कारखानों के अम्लीय अपशिष्ट को जलाशयों या झीलों में बहाने से पहले उदासीन करना क्यों आवश्यक है?

उत्तर: यदि कारखानों का अम्लीय अपशिष्ट सीधे झील या नदियों में छोड़ दिया जाए, तो पानी अत्यधिक अम्लीय हो जाएगा। इससे मछलियाँ और अन्य जलीय जीव मर सकते हैं। इसलिए, जीवों की सुरक्षा के लिए अपशिष्ट में क्षारीय पदार्थ मिलाकर उसे पहले उदासीन किया जाता है।

प्रश्न 5: हल्दी-पत्र (Turmeric paper) का उपयोग किस प्रकार के पदार्थों की जाँच के लिए किया जाता है? क्या इससे अम्ल की पहचान हो सकती है?

उत्तर: हल्दी-पत्र का उपयोग केवल क्षारीय पदार्थों की जाँच के लिए किया जाता है, क्योंकि क्षार के संपर्क में आते ही हल्दी का पीला रंग लाल हो जाता है (जैसे साबुन का घोल)। हल्दी-पत्र का रंग अम्लीय और उदासीन विलयनों में अपरिवर्तित (पीला ही) रहता है, इसलिए इससे अम्ल और उदासीन पदार्थों के बीच अंतर नहीं किया जा सकता।

प्रश्न 6: घ्राण सूचक (Olfactory Indicators) किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।

उत्तर: ऐसे पदार्थ जिनकी गंध (Smell) अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है या समाप्त हो जाती है, उन्हें घ्राण सूचक कहते हैं। उदाहरण: बारीक कटा हुआ प्याज। प्याज के अर्क की गंध इमली के पानी (अम्ल) से नहीं बदलती, लेकिन बेकिंग सोडा (क्षार) मिलाने पर उसकी गंध बदल या समाप्त हो जाती है।

प्रश्न 7: अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से खेती की मिट्टी खराब होने पर किसान उसका उपचार कैसे करते हैं?

उत्तर: रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मृदा (मिट्टी) अम्लीय हो जाती है, जिससे पौधों का विकास रुक जाता है। इसके उपचार के लिए मिट्टी में चूना (कैल्शियम ऑक्साइड या कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) मिलाया जाता है, जो क्षारीय होने के कारण मिट्टी के अम्ल को उदासीन कर देता है। (यदि मिट्टी क्षारीय हो, तो उसमें कंपोस्ट या जैविक खाद मिलाई जाती है)

प्रश्न 8: लाल गुलाब का अर्क अम्लीय और क्षारीय विलयनों में कौन-सा रंग देता है?

उत्तर: लाल गुलाब का अर्क एक प्राकृतिक सूचक है। यह:

अम्लीय विलयन (जैसे नींबू का रस) मिलाने पर लाल वर्ण (रंग) का हो जाता है।

क्षारीय विलयन (जैसे साबुन का घोल) मिलाने पर हरे वर्ण (रंग) का हो जाता है।

प्रश्न: 9 अश्विन और कीर्ति को विज्ञान मेले में दिए गए श्वेत कागज़ पर द्रव छिड़कने से 'विज्ञान के अद्भुत जगत में आपका स्वागत है' क्यों लिखा दिखा?

उत्तर: कागज़ पर संदेश को पहले साबुन के विलयन (क्षार) से लिखा गया था, जो सूखने पर अदृश्य हो गया। जब उस पर हल्दी के विलयन (प्राकृतिक सूचक) का छिड़काव किया गया, तो क्षार और हल्दी की क्रिया के कारण वह संदेश लाल रंग में उभर कर दिखाई देने लगा।

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