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Sunday, May 31, 2026

8th Class Science अध्याय 4: "विद्युत चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव" Chapter 4: "Electromagnetic and Thermal Effects")

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8th Class Science अध्याय 4: "विद्युत चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव"

(Chapter 4: "Electromagnetic and Thermal Effects")

(Class 8 Science Notes in Hindi)

दिए गए "खोजबीन और विचार करें" अनुभाग के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

मुख्य विचारणीय प्रश्न (खोजबीन और विचार करें)

  1. विद्युत धारा का पता लगाना: विद्युत सेल से विद्युत-परिपथ बनाते समय यदि हमारे पास विद्युत लैंप (बल्ब) नहीं है, तो क्या हमारे पास कोई अन्य विधि है जिसके द्वारा हम पता लगा सकते हैं कि उस परिपथ में धारा प्रवाहित हो रही है या नहीं?

  2. अस्थायी चुंबक: क्या अस्थायी चुंबक (जैसे विद्युत चुंबक) बनाना संभव है? इन्हें कैसे बनाया जा सकता है?

  3. तापीय प्रभाव: हम जीवाश्म ईंधन एवं लकड़ी को जलाकर ऊष्मा उत्पन्न करते हैं, परंतु विभिन्न प्रकार के विद्युत उपकरणों (जैसे हीटर, गीजर, प्रेस आदि) में ऊष्मा कैसे उत्पन्न होती है?

  4. सेल या बैटरी की कार्यक्षमता: हम कैसे ज्ञात कर सकते हैं कि कोई सेल अथवा बैटरी अब कार्य के योग्य नहीं रह गई है (यानी डिस्चार्ज हो गई है)? क्या सभी प्रकार के सेलों अथवा बैटरियों को पुनः आवेशित (Recharge) करके कार्य के योग्य बनाया जा सकता है?

स्मरणीय बिंदु

  1. जब किसी चालक (जैसे — तार) से विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो यह इसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। इस परिघटना को विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं।

  2. चुंबक की भाँति व्यवहार करने वाली धारावाही कुंडली को विद्युत-चुंबक कहते हैं। व्यावहारिक अनुप्रयोगों हेतु अधिकांश विद्युत-चुंबकों में इन्हें प्रबल चुंबक बनाने हेतु एक लोहे का क्रोड लगा होता है।

  3. चालकों में विद्युत धारा प्रवाहित होने के कारण ऊष्मा का उत्पन्न होना विद्युत-धारा का तापीय प्रभाव कहलाता है।

  4. सेल अथवा बैटरी एक ऐसी युक्ति है जो उसके भीतर होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं के कारण विद्युत धारा उत्पन्न करती है।

  5. पुनः आवेशनीय बैटरियों को आवेशित करके उनका पुनः उपयोग किया जा सकता है।

  • (i) विद्युत इस्त्री (प्रेस) विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करती है।

  • (ii) एक विद्युत-चुंबक का चुंबकीय प्रभाव तब तक रहता है जब तक कि उसमें विद्युत धारा प्रवाहित होती रहती है।

  • (iii) किसी कुंडली में फेरों (लपेटों) की संख्या बढ़ाने पर उसका चुंबकीय क्षेत्र प्रबल (अधिक) हो जाता है।

8th Class Science अध्याय 4: "विद्युत चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव"

जिज्ञासा बनाए रखें अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर (Textbook Solutions)

प्रश्न 1. रिक्त स्थान भरिए-

(i) वोल्टीय सेल में प्रयुक्त होने वाला विलयन _______________ कहलाता है।

उत्तर: (i) वोल्टीय सेल में प्रयुक्त होने वाला विलयन विद्युत-अपघट्य (Electrolyte) कहलाता है।

व्याख्या: वोल्टीय सेल या किसी भी रासायनिक सेल में जो रासायनिक द्रव उपयोग किया जाता है, जिसके माध्यम से आयनों का प्रवाह होता है, उसे विद्युत-अपघट्य कहते हैं। (आमतौर पर इसमें तनु सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग होता है)

(ii) एक धारावाही कुंडली _______________ की भाँति व्यवहार करती है।

उत्तर:(ii) एक धारावाही कुंडली चुंबक (विद्युत-चुंबक) की भाँति व्यवहार करती है।

व्याख्या: जब किसी कुंडली (तार के फेरों) से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो वह अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र बनाती है और एक सामान्य छड़ चुंबक की तरह व्यवहार करने लगती है।

2. सही विकल्प चुनिए—

(i) शुष्क सेल, वोल्टीय सेल की तुलना में कम सुवाह्य है। (सत्य/असत्य)

उत्तर: (i) असत्य

व्याख्या: शुष्क सेल (जैसे टॉर्च या रिमोट के सेल) में कोई द्रव नहीं होता, इसलिए इसे कहीं भी ले जाना (सुवाह्य या Portable होना) बहुत आसान होता है। इसके विपरीत, वोल्टीय सेल में द्रव एसिड होता है जिसके छलकने का डर रहता है। इसलिए शुष्क सेल अधिक सुवाह्य होता है, कम नहीं।

(ii) कुंडली तभी विद्युत-चुंबक बनती है जब कुंडली से विद्युत धारा प्रवाहित होती है। (सत्य/असत्य)

उत्तर: (ii) सत्य

व्याख्या: विद्युत-चुंबक एक अस्थायी चुंबक होता है। इसका चुंबकीय गुण केवल तब तक रहता है जब तक उसमें विद्युत धारा बहती है। धारा बंद करते ही इसका चुंबकत्व समाप्त हो जाता है।

(iii) एक सेल के उपयोग से बना विद्युत-चुंबक दो सेलों की बैटरी के उपयोग से बने उसी विद्युत-चुंबक की अपेक्षा लोहे के अधिक कागज-क्लिपों को आकर्षित करता है। (सत्य/असत्य)

उत्तर: (iii) असत्य

व्याख्या: दो सेलों की बैटरी से अधिक विद्युत धारा (Current) प्रवाहित होगी। जितनी अधिक विद्युत धारा होगी, विद्युत-चुंबक उतना ही अधिक शक्तिशाली (प्रबल) बनेगा। इसलिए दो सेलों वाली बैटरी वाला चुंबक अधिक क्लिपों को आकर्षित करेगा, एक सेल वाला कम।

प्रश्न 3. सही विकल्प का चयन कीजिए:

किसी निक्रोम (नाइक्रोम) के तार में अल्प समय के लिए विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है।

(i) तार गर्म हो जाता है।

(ii) तार के नीचे रखे चुंबकीय दिक्सूचक की सुई विक्षेपित हो जाती है।

() केवल विकल्प (i) सही है।

() केवल विकल्प (ii) सही है।

() विकल्प (i) और (ii) दोनों सही हैं।

() विकल्प (i) और (ii) दोनों सही नहीं हैं।

उत्तर: () विकल्प (i) और (ii) दोनों सही हैं।

कारण: निक्रोम तार में धारा बहने पर तापीय प्रभाव के कारण वह गर्म भी होगा और चुंबकीय प्रभाव के कारण दिक्सूचक सुई भी हिलेगी।

प्रश्न 4. स्तम्भ ‘क’ में दिए गए एकांशों का मिलान स्तम्भ ‘ख’ में दिए गए एकांशों से कीजिए ।

उत्तर:

स्तंभ ''

स्तंभ ''

(i) वोल्टीय सेल

() रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा विद्युत उत्पन्न करता है।

(ii) विद्युत इस्तरी

() विद्युत धारा के तापीय प्रभाव पर कार्य करती है।

(iii) निक्रोम तार

() विद्युत तापन हेतु सर्वाधिक उपयुक्त

(iv) विद्युत-चुंबक

() विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर कार्य करता है।


प्रश्न 5. सामान्यत: / आमतौर पर, विद्युत तापन युक्तियों (इलेक्ट्रिक हीटिंग उपकरणों) में निक्रोम (नाइक्रोम) तार का उपयोग किया जाता है क्योंकि यह—

(i) विद्युत / बिजली का एक अच्छा सुचालक है।

(ii) विद्युत / बिजली की एक निश्चित मात्रा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है।

(iii) तांबे की तुलना में सस्ता है।

(iv) विद्युत / बिजली का एक कुचालक है।

उत्तर: (ii) विद्युत/बिजली की एक निश्चित मात्रा के लिए अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है।

निक्रोम तार का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि:

1. उच्च प्रतिरोधकता (High Resistivity): नाइक्रोम (Nichrome) एक मिश्र धातु (निकेल और क्रोमियम) है। इसका प्रतिरोध (Resistance) तांबे या एल्युमिनियम जैसे सामान्य चालकों की तुलना में बहुत अधिक होता है। जब इससे विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उच्च प्रतिरोध के कारण यह धारा का विरोध करता है और बिजली की एक निश्चित मात्रा के लिए बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा (गर्मी) उत्पन्न करता है।

2. उच्च गलनांक (High Melting Point): नाइक्रोम का गलनांक बहुत उच्च होता है (लगभग 1400°C)। इसका मतलब है कि अत्यधिक गर्म होने पर भी यह पिघलता नहीं है।

3. ऑक्सीकरण न होना (No Oxidation): लाल-गर्म होने पर भी नाइक्रोम हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके जलता या टूटता नहीं है।

प्रश्न 6. विद्युत तापन युक्तियों (जैसे — विद्युत कक्ष तापक अथवा इलेक्ट्रिक रूम हीटर) को प्राय: पारंपरिक तापन विधियों (जैसे — लकड़ी अथवा कोयला/चारकोल जलाना) की तुलना में अधिक सुविधाजनक माना जाता हैं। आधुनिक समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस कथन के समर्थन हेतु कारण बताइए ।

                                                         अथवा

विद्युत-तापी युक्तियों (जैसे—विद्युत रूम-हीटर) को लकड़ी या चारकोल जलाने की तुलना में अधिक सुविधाजनक क्यों माना जाता है? समाज पर इसके प्रभावों को ध्यान में रखकर कारण बताइए।

उत्तर: विद्युत तापन युक्तियों (जैसे — इलेक्ट्रिक हीटर) को पारंपरिक विधियों (जैसे — लकड़ी या कोयला जलाना) की तुलना में अधिक सुविधाजनक और सामाजिक रूप से बेहतर मानने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  • स्वास्थ्य और स्वच्छता (धुआं-रहित): पारंपरिक ईंधन जलाने से जहरीली गैसें और धुआं निकलता है, जिससे फेफड़ों की गंभीर बीमारियां होती हैं। विद्युत हीटर पूरी तरह धुंआ-रहित होते हैं, जिससे घर के अंदर की वायु शुद्ध और स्वच्छ रहती है।

  • सुरक्षा: बंद कमरों में कोयला जलाने से दम घुटने (कार्बन मोनोऑक्साइड के कारण) और खुली आग से दुर्घटना का खतरा रहता है। आधुनिक विद्युत उपकरणों में 'ऑटो-कट' जैसे फीचर्स होते हैं, जिससे ये बेहद सुरक्षित हैं।

  • पर्यावरण संरक्षण: लकड़ी के उपयोग से वनों की कटाई (Deforestation) होती है। विद्युत उपकरणों का उपयोग करने से पेड़ों की कटाई रुकती है और पर्यावरण का संतुलन बना रहता है।

  • समय और श्रम की बचत: लकड़ी इकट्ठा करने, काटने और आग जलाने में बहुत मेहनत और समय लगता है। विद्युत हीटर केवल एक बटन दबाते ही तुरंत काम करने लगते हैं, जिससे समाज के लोगों (विशेषकर महिलाओं) का समय और श्रम बचता है।

संक्षेप में, विद्युत युक्तियाँ समाज को एक स्वच्छ, सुरक्षित, प्रदूषण-मुक्त और आधुनिक जीवन स्तर प्रदान करती हैं।

                                                   अथवा

इसके निम्नलिखित मुख्य कारण हैं:

(i). पर्यावरण के अनुकूल (प्रदूषण मुक्त): हीटर चलाने से धुआँ, कार्बन मोनोऑक्साइड या जहरीली गैसें नहीं निकलतीं, जिससे हवा शुद्ध रहती है और स्वास्थ्य को नुकसान नहीं होता। जबकि लकड़ी जलाने से भारी प्रदूषण और स्वास्थ्य को नुकसान होता है।

(ii). वनों का संरक्षण: हीटर के उपयोग से लकड़ी की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे पेड़ों की कटाई रुकती है। जबकि लकड़ी के उपयोग से वनों की कटाई (Deforestation) होती है।

(iii). समय और श्रम की बचत: इसे केवल एक स्विच ऑन करके तुरंत चलाया जा सकता है। कोयला या लकड़ी की तरह इसे सुलगाने में समय नहीं लगता और न ही राख साफ करनी पड़ती है।

प्रश्न 7. चित्र 4.4 () का अवलोकन कीजिए । यदि इसमें कुंडली के समीप / पास रखी दिक्सूचक / कंपास की सुई में कोई विक्षेपण होता है तो —

(I). विद्युत धारा की दिशा दर्शाने के लिए आरेख पर एक तीर का निशान लगाएँ।

(ii). समझाएँ कि जब कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो कंपास की सुई में विक्षेप क्यों होता है।

(iii). यदि आप बैटरी के टर्मिनलों को उलट देते हैं, तो अनुमान लगाएँ कि विक्षेप पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।

उत्तर: तीनों प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर निम्नलिखित हैं-

(i) विद्युत धारा का पथ:

विद्युत धारा हमेशा बैटरी के धनात्मक सिरे (+) से ऋणात्मक सिरे (-) की ओर बहती है।

अतः चित्र () में धारा दाईं ओर (+) से ऊपर चढ़ेगी, कुंडली में '' से '' की ओर बहेगी, और बाईं ओर से नीचे आकर (-) सिरे में चली जाएगी।

(ii) दिक्सूचक सुई क्यों घूमती है?

उत्तर: कुंडली में विद्युत धारा बहने पर विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न होता है, जिससे कुंडली एक चुंबक (विद्युत-चुंबक) बन जाती है। इस चुंबकीय बल के कारण दिक्सूचक की सुई घूम जाती है।

(iii) बैटरी के सिरों को उल्टा करने पर प्रभाव:

पूर्वानुमान: बैटरी के सिरे उलटने से विद्युत धारा के प्रवाह की दिशा उलट जाएगी। इसके परिणामस्वरूप, दिक्सूचक सुई के विक्षेप (घूमने) की दिशा भी ठीक विपरीत (उल्टी) हो जाएगी।

प्रश्न 8 मान लीजिए कि अध्याय के आरंभ में उल्लिखित कहानी में सुमना अपने उत्थापक विद्युत-चुंबक प्रदर्श (Elevator Electromagnet Demo) के स्विच को 'ऑफ' करना भूल जाती है। कुछ समय पश्चात लोहे की कील लोहे से बनी कागज-क्लिपों को नहीं उठा पाती है परंतु लोहे की कील के चारों ओर लपेटा गया तार अभी भी गरम है। उत्थापक विद्युत-चुंबक ने क्लिपों को उठाना क्यों बंद कर दिया? संभावित कारण बताइए।

उत्तर: इसके दो प्रमुख संभावित वैज्ञानिक कारण हैं:

  1. बैटरी का डिस्चार्ज होना: स्विच लगातार चालू रहने से बैटरी की पूरी रासायनिक ऊर्जा समाप्त हो गई। परिपथ में विद्युत धारा का प्रवाह बंद होने के कारण लोहे की कील का चुंबकत्व समाप्त हो गया।

  2. अत्यधिक ऊष्मा (विचुंबकन): विद्युत धारा के तापीय प्रभाव के कारण कील और तार अत्यधिक गर्म हो गए। विज्ञान के नियम के अनुसार, अत्यधिक गर्म होने पर चुंबकीय पदार्थ अपना चुंबकत्व खो देते हैं।

  3. तार के अभी भी गर्म होने का कारण धातुओं में बची हुई अवशिष्ट ऊष्मा है, जिसे ठंडा होने में थोड़ा समय लगता है। इसलिए तार अभी भी गर्म महसूस हो रहा था।

प्रश्न 9. चित्र 4.12 () और () में से किस चित्र में स्विच बंद (ऑन) होने पर एल..डी. (LED) दीप्त होगी (चमकेगी)?

 

उत्तर: केवल चित्र () में स्विच ऑन (बंद) होने पर एल..डी. (LED) दीप्त होगी।

कारण: चित्र () में नीबू का रस उपयोग किया गया है। नीबू का रस (अम्लीय होने के कारण) विद्युत का एक अच्छा सुचालक होता है, जिससे परिपथ पूरा हो जाता है और करंट बहने लगता है। इसके विपरीत, चित्र () में 'शुद्ध जल' (आसुत जल) भरा है, जो विद्युत का कुचालक होता है, इसलिए उसमें बल्ब नहीं जलेगा।

प्रश्न 10. नेहा ठीक वैसी ही कुंडली लेती है जैसी क्रियाकलाप 4.4 मेें ली गई थी किंतु वह इसके

भीतर से लोहे की कील को बाहर निकाल देती है जिससे केवल तार से बनी कुंडली ही रह जाती है। क्या कुंडली अभी भी दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगी? यदि हाँ, तो क्या विक्षेपण पहले की तुलना मेें अधिक होगा अथवा कम?

                                              अथवा

यदि नेहा कुंडली के भीतर से लोहे की कील को बाहर निकाल देती है, तो क्या केवल तार से बनी कुंडली अभी भी दिक्सूचक सुई को विक्षेपित (विचलित) करेगी? क्या विक्षेपण कम होगा या अधिक?

उत्तर: हाँ, कुंडली अभी भी दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगी क्योंकि तार में धारा बहने पर चुंबकीय क्षेत्र तब भी बनता है। यह विक्षेपण पहले की तुलना में बहुत कम होगा। लोहे की कील (क्रोड) चुंबकीय क्षेत्र को कई गुना बढ़ा देती है, उसके हटने से चुंबकीय बल बहुत कमजोर हो जाता है।

                                अथवा

उत्तर: हाँ, कुंडली अभी भी दिक्सूचक सुई को विक्षेपित करेगी। यह विक्षेपण पहले की तुलना में बहुत कम होगा। जब किसी भी सीधे या लिपटे हुए तार से बिजली बहती है, तो उसके पास चुंबकीय क्षेत्र अपने आप बनता है। लेकिन जब उसके अंदर लोहे की कील (क्रोड) डाली जाती है, तो वह चुंबकीय शक्ति को कई गुना बढ़ा देती है। कील निकालने से चुंबकीय बल बहुत कमजोर हो जाता है, जिससे सुई बहुत कम हिलेगी।

प्रश्न 11. चित्र 4.13 में दर्शाए अनुसार हमारे पास लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम एवं निक्रोम की बनी एक जैसी आकृति और आकार की चार कुंडलियाँ हैं।

जब कुंडलियों से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो कुंडलियों के समीप रखी दिक्सूचक सुइयाँ विक्षेपण दर्शाएँगी—

(i) केवल परिपथ () में

(ii) केवल परिपथ () और () में

(iii) केवल परिपथ (), () और () में

(iv) सभी चारों परिपथों में

उत्तर: (iv) सभी चारों परिपथों में

कारण: चाहे धातु कोई भी हो (लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम या निक्रोम), यदि वह विद्युत की सुचालक है और उसमें से करंट बह रहा है, तो वह अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र जरूर बनाएगी। इसलिए दिक्सूचक की सुई चारों ही स्थितियों में हिलेगी।

8th Class Science अध्याय 4: "विद्युत चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव"

बहुविकल्पीय प्रश्न (सही विकल्प चुनिए)-

प्रश्न 1. जब किसी चालक से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो इसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। यह विद्युत धारा का कौन-सा प्रभाव है?

() रासायनिक प्रभाव () तापीय प्रभाव

() चुंबकीय प्रभाव () इनमें से कोई नहीं

उत्तर: () चुंबकीय प्रभाव

प्रश्न 2. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव की खोज सबसे पहले किसने की थी?

() माइकल फैराडे () हैंस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड

() थॉमस अल्वा एडिसन () अलेक्जेंड्रो वोल्टा

उत्तर: () हैंस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड

प्रश्न 3. विद्युत हीटर या विद्युत इस्तरी (प्रेस) में किस धातु के तार की कुंडली (Element) का उपयोग किया जाता है?

() ताँबा () लोहा

() निक्रोम (Nichrome) () एल्युमिनियम

उत्तर: () निक्रोम

8th Class Science अध्याय 4: "विद्युत चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव"

इस अध्याय के अन्य महत्वपूर्ण परीक्षा उपयोगी प्रश्न-उत्तर

प्रश्न 1. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव की खोज किसने की थी?

उत्तर: वैज्ञानिक हैंस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड ने।

प्रश्न 2. कोई बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज (खराब) होने पर भी उसे कचरे में क्यों नहीं फेंकना चाहिए?

उत्तर: क्योंकि उसमें सीसा, कैडमियम या लीथियम जैसी हानिकारक धातुएँ और तेजाब (अम्ल) होता है, जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकता है और आग भी लगा सकता है।

प्रश्न 3. विद्युत घंटी (Electric Bell) में विद्युत धारा के किस प्रभाव का उपयोग होता है और यह कैसे काम करती है?

उत्तर: विद्युत घंटी में विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव का उपयोग होता है। जब हम घंटी का बटन दबाते हैं, तो उसके अंदर लगी कुंडली में करंट बहने से वह विद्युत-चुंबक बन जाती है। यह चुंबक लोहे की एक पत्ती (हथौड़े) को अपनी तरफ खींचता है, जिससे हथौड़ा धातु की कटोरी पर जाकर टकराता है और 'टन-टन' की आवाज आती है।

प्रश्न 4. कुंडली में फेरों (लपेटों) की संख्या का विद्युत-चुंबक की ताकत पर क्या असर पड़ता है? प्रयोग द्वारा समझाइए।

उत्तर: कुंडली में तार के फेरों (Turns) की संख्या जितनी अधिक होगी, विद्युत-चुंबक उतना ही ज्यादा शक्तिशाली बनेगा।

प्रयोग: 1. यदि हम एक लोहे की कील पर तार के 25 फेरे लपेटकर करंट दें, तो वह केवल 2-3 पेपर-क्लिप ही उठा पाएगी।

2. यदि हम उसी कील पर फेरों की संख्या बढ़ाकर 100 फेरे कर दें और फिर उतना ही करंट दें, तो वह चुंबक बहुत मजबूत हो जाएगा और एक साथ बहुत सारी क्लिपों को उठा लेगा। इससे सिद्ध होता है कि फेरे बढ़ाने से चुंबकीय बल बढ़ता है।

प्रश्न 5. विद्युत धारा का तापीय प्रभाव क्या है?

उत्तर: जब किसी तार से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो वह तार गर्म हो जाता है। इसे विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 6. विद्युत-चुंबक (Electromagnet) किसे कहते हैं?

उत्तर: लोहे के टुकड़े पर लिपटी विद्युत रोधी तार की कुंडली में जब धारा प्रवाहित की जाती है, तो वह चुंबक की तरह व्यवहार करने लगती है। इसे विद्युत-चुंबक कहते हैं। यह एक अस्थायी चुंबक होता है।

प्रश्न 7. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव पर काम करने वाले किसी एक घरेलू उपकरण का नाम लिखिए।

उत्तर: विद्युत घंटी (Electric Bell) या बिजली का पंखा।

प्रश्न 8. विद्युत धारा का तापीय प्रभाव क्या है?

उत्तर: जब किसी चालक तार से विद्युत धारा बहती है, तो वह तार गर्म हो जाता है। इसे ही विद्युत धारा का तापीय प्रभाव कहते हैं।

प्रश्न 9. विद्युत-चुंबक (Electromagnet) किसे कहते हैं?

उत्तर: लोहे के टुकड़े पर लिपटे तार की कुंडली में जब विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो वह टुकड़ा चुंबक की तरह व्यवहार करने लगता है। इसे विद्युत-चुंबक कहते हैं।

प्रश्न 10. क्या विद्युत-चुंबक एक स्थायी चुंबक है?

उत्तर: नहीं, यह एक अस्थायी चुंबक है। इसमें चुंबकत्व केवल तब तक रहता है जब तक तार में विद्युत धारा बहती रहती है।

प्रश्न 11. दिक्सूचक (Magnetic Compass) की सुई किस दिशा में ठहरती है?

उत्तर: उत्तर-दक्षिण (North-South) दिशा में।

प्रश्न 12. विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव की खोज सबसे पहले किसने की थी?

 उत्तर: हैंस क्रिश्चियन ऑर्स्टेड (Hans Christian Oersted) ने।

प्रश्न 13. क्या किसी वोल्टीय सेल (बैटरी) के भीतर रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा विद्युत उत्पन्न होती है?

 उत्तर: हाँ, सेल के भीतर संचित रसायनों में रासायनिक अभिक्रिया के कारण विद्युत धारा उत्पन्न होती है।


8th Class Science अध्याय 4: "विद्युत चुंबकीय एवं तापीय प्रभाव"

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Questions)

प्रश्न 1. एक साधारण विद्युत-चुंबक कैसे बनाया जाता है? सचित्र समझाइए कि इसकी शक्ति (प्रबलता) को कैसे बढ़ाया जा सकता है?

उत्तर: बनाने की विधि: लोहे की एक बड़ी कील लीजिए। इसके ऊपर तांबे के विद्युत-रोधी (insulated) तार को कड़े आकार में लपेटकर एक कुंडली बनाइए। तार के दोनों सिरों को एक स्विच के माध्यम से बैटरी (सेल) से जोड़ दीजिए। जैसे ही स्विच 'ऑन' करेंगे, कील चुंबक बन जाएगी और लोहे की पिनों को चिपकाने लगेगी। स्विच 'ऑफ' करते ही इसका चुंबकत्व खत्म हो जाएगा।

विद्युत-चुंबक की प्रबलता बढ़ाने के उपाय:

  1. फेरों की संख्या बढ़ाकर: कुंडली में तार के लपेटों (फेरों) की संख्या जितनी अधिक होगी, चुंबक उतना ही मजबूत होगा।

  2. विद्युत धारा बढ़ाकर: परिपथ में सेलों की संख्या बढ़ाकर (ज्यादा पावर की बैटरी लगाकर) अधिक धारा प्रवाहित करने से चुंबकीय बल बढ़ जाता है।

प्रश्न 2. विद्युत-चुंबक (Electromagnet) क्या होता है? इसकी प्रबलता कैसे बढ़ाई जा सकती है?

 उत्तर: जब किसी सुचालक तार की कुंडली के भीतर लोहे की कील या क्रोड रखकर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो वह चुंबक की तरह व्यवहार करने लगता है। इसे विद्युत-चुंबक कहते हैं। इसकी प्रबलता कुंडली में फेरों (turns) की संख्या बढ़ाकर, या परिपथ में विद्युत धारा का परिमाण (सेल की संख्या) बढ़ाकर बढ़ाई जा सकती है।

प्रश्न 3. किसी विद्युत-चुंबक की शक्ति (प्रबलता) को किन दो तरीकों से बढ़ाया जा सकता है?

उत्तर: विद्युत-चुंबक की शक्ति को निम्नलिखित तरीकों से बढ़ाया जा सकता है:

फेरों की संख्या बढ़ाकर: तार की कुंडली में लपेटों (फेरों) की संख्या अधिक करने से चुंबकीय बल बढ़ जाता है।

विद्युत धारा बढ़ाकर: परिपथ में अधिक सेल जोड़कर (ज्यादा करंट देकर) चुंबक को और शक्तिशाली बनाया जा सकता है।

प्रश्न 4. बिजली के चूल्हे या हीटर में निक्रोम (Nichrome) के तार का उपयोग क्यों किया जाता है?

उत्तर: निक्रोम तार का उपयोग करने के दो मुख्य कारण हैं:

इसका प्रतिरोध बहुत उच्च होता है, जिससे यह बहुत जल्दी और बहुत ज्यादा गर्म (ऊष्मा उत्पन्न) होता है।

यह उच्च तापमान पर भी जल्दी पिघलता या जलता नहीं है।

प्रश्न 5. पारंपरिक ईंधन (जैसे लकड़ी या कोयला) की तुलना में विद्युत-हीटर का उपयोग करना अधिक सुविधाजनक क्यों है?

उत्तर: प्रदूषण मुक्त: हीटर से कोई धुआँ या जहरीली गैस नहीं निकलती, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य ठीक रहता है।

समय की बचत: इसे स्विच ऑन करते ही तुरंत गर्मी मिलने लगती है, लकड़ी की तरह सुलगाना नहीं पड़ता।

सफाई: इसमें कोई राख या कचरा नहीं बचता।

 

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